NEET और JEE परीक्षा में सुरक्षा बढ़ी: NTA का फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम क्या बदलेगा?
NEET: भारत में हर साल लाखों छात्र NEET और JEE जैसी बड़ी परीक्षाओं में बैठते हैं। ये परीक्षाएं छात्र के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। इसी वजह से इन परीक्षाओं में सुरक्षा और निष्पक्षता बनाए रखना बहुत जरूरी है। हाल ही में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने इन परीक्षाओं में फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम लागू करने का फैसला किया है। इसका मकसद है कि परीक्षा में किसी भी तरह की धोखाधड़ी को रोका जा सके और केवल वही छात्र परीक्षा में बैठ सकें, जिनके नाम सही तरीके से पंजीकृत हैं।
NEET और JEE में सुरक्षा बढ़ी: NTA का नया फेसियल सिस्टम
फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम का मतलब है कि परीक्षा केंद्र पर छात्र के चेहरे की सत्यापित पहचान की जाएगी। पहले छात्रों की केवल पहचान पत्र और रोल नंबर के आधार पर परीक्षा में प्रवेश होता था। लेकिन कभी-कभी यह तरीका पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता था। कुछ मामलों में नकली छात्र या गलत पहचान की घटनाएं सामने आती थीं। इस नई तकनीक में परीक्षा से पहले छात्र की फोटो और पहचान जानकारी NTA के डेटाबेस में सुरक्षित रखी जाती है। परीक्षा के दिन छात्र को कैमरे के सामने खड़ा होना होता है। कैमरा उसके चेहरे को डेटाबेस में रखी फोटो से मिलाता है। अगर फोटो मेल खाती है, तभी छात्र को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाती है। इस तरह यह सुनिश्चित होता है कि परीक्षा में केवल वही छात्र शामिल हों, जिनके नाम सही हैं।
फेसियल रिकॉग्निशन से अब परीक्षा में धोखाधड़ी नहीं चलेगी
NTA का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य परीक्षा की निष्पक्षता बढ़ाना और धोखाधड़ी रोकना है। अब परीक्षा में कोई भी छात्र दूसरे की जगह नहीं बैठ सकता। इससे परीक्षा का स्तर और भरोसा दोनों बढ़ेगा। छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए यह बदलाव कुछ नया है। छात्रों को यह ध्यान रखना होगा कि उनका डेटाबेस में फोटो और जानकारी सही और अपडेटेड हो। परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो सकती है क्योंकि पहले फेसियल रिकॉग्निशन से सत्यापन करना होगा। अभिभावकों को भी समझना होगा कि यह कदम छात्रों की सुरक्षा और परीक्षा की निष्पक्षता के लिए जरूरी है।

छात्रों और अभिभावकों के लिए नए नियम और तैयारी
फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम से परीक्षा केंद्र पर भी बदलाव आएंगे। छात्रों को सबसे पहले कैमरे के सामने अपना चेहरा दिखाना होगा। उसके बाद ही उन्हें परीक्षा हॉल में जाने की अनुमति मिलेगी। इसके साथ ही सुरक्षा और निगरानी भी बढ़ाई जाएगी, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकी जा सके। इस नई प्रणाली का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह परीक्षा को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाती है। छात्र और अभिभावक यह भरोसा कर सकते हैं कि परीक्षा में किसी तरह की धोखाधड़ी नहीं होगी। इससे योग्य और मेहनती छात्र ही आगे बढ़ेंगे। भविष्य में इस तकनीक का उपयोग और बढ़ सकता है। अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इसे लागू किया जा सकता है। इससे छात्रों की पहचान सुरक्षित रहेगी और परीक्षा प्रक्रिया और पारदर्शी बनेगी।
भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में बदलाव और फायदे
छात्रों के लिए यह जरूरी है कि वे अपना डेटा सही रखें, परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचें और प्रक्रिया का पालन करें। इससे वे बिना किसी चिंता के परीक्षा में शामिल हो सकते हैं और केवल अपनी मेहनत पर भरोसा रख सकते हैं। इस तरह, NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम लागू करना एक महत्वपूर्ण कदम है। यह छात्रों के लिए सुरक्षा, निष्पक्षता और भरोसा सुनिश्चित करता है और आने वाले समय में परीक्षा प्रक्रिया को और बेहतर बनाएगा।









