Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसलों के लिए नया फॉर्मेट तय किया; गवाहों और सबूतों का चार्ट बनाना अनिवार!
Welcome to apcspanishschool न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और स्पष्टता बढ़ाने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसलों के लिए नया फॉर्मेट तय किया है। अब ट्रायल कोर्ट को अपने निर्णयों में गवाहों और सबूतों का स्पष्ट चार्ट बनाना अनिवार्य होगा। इस बड़े फैसले को न्याय प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, समझने योग्य और निष्पक्ष बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ अपीलीय अदालतों को सुविधा मिलेगी, बल्कि आम लोगों को भी फैसले समझने में आसानी होगी।
नया फॉर्मेट क्यों जरूरी माना गया
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कई बार ट्रायल कोर्ट के फैसलों में तथ्यों, गवाहों और सबूतों का विवरण बिखरा हुआ होता है। इससे अपील के दौरान उच्च अदालतों को पूरे रिकॉर्ड को दोबारा समझने में समय लगता है। नया फॉर्मेट अपनाने से यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन-सा गवाह किस तथ्य का समर्थन करता है और कौन-सा सबूत किस आरोप से जुड़ा है। इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होगी।

नए फॉर्मेट में क्या-क्या शामिल करना होगा?
इस नए निर्देश के तहत ट्रायल कोर्ट को फैसले में एक चार्ट या टेबल शामिल करनी होगी। इसमें गवाहों के नाम, उनके बयान का सार, संबंधित सबूत और यह स्पष्ट उल्लेख होगा कि अदालत ने उन्हें किस आधार पर स्वीकार या अस्वीकार किया। साथ ही यह भी बताना होगा कि कौन-सा सबूत अभियोजन या बचाव पक्ष के पक्ष में गया। इससे फैसले की लॉजिक और निष्कर्ष दोनों साफ दिखाई देंगे।
आम लोगों और वकीलों को क्या फायदा होगा?
इस फैसले से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ट्रायल कोर्ट के निर्णय ज्यादा पारदर्शी और समझने योग्य बनेंगे। वकीलों को अपील तैयार करने में आसानी होगी और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि अदालत ने किस आधार पर फैसला दिया। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि इससे न्याय में देरी कम होगी और गलतफहमियों की गुंजाइश भी घटेगी। यह कदम भारतीय न्याय प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।









